जीवन एक अनोखा संग्राम है। हर कोई अपने हिस्से के दुख, संघर्ष और आशाओं को साथ लेकर चलता है। कोई बीमार है, कोई कर्ज से घिरा है, किसी के घर में कलह है, किसी के मन में भय। इन सबके बीच हम ढूंढते हैं एक ऐसा सहारा, जो हमें टूटने न दे। मेरे जीवन में भी ऐसे कई दौर आए जब चारों तरफ निराशा थी। पर जैसे ही मैंने संकटमोचन हनुमान जी का स्मरण किया, मन में अपार साहस और शक्ति का संचार हुआ। वही शक्ति, वही आस्था आज मुझे प्रेरित कर रही है कि मैं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करूं और हर श्रद्धावान आत्मा के कल्याण के लिए कुछ करूं। यही विचार मेरे मन में यह संकल्प लेकर आया – 1000 सुंदरकांड पाठ का अखंड अनुष्ठान, जो केवल मेरा नहीं, हम सभी का पुण्य-कार्य है।
रामचरितमानस का सुंदरकांड कोई साधारण कथा नहीं है। यह वह अध्याय है, जहां श्री हनुमान जी ने असंभव को संभव कर दिखाया। लंका जैसी दुष्ट शक्तियों की भूमि में वे निर्भीक होकर पहुंचे, माता सीता को आश्वासन दिया, रावण को ललकारा और रामकथा का दीप प्रज्वलित किया। सदियों से यह माना जाता है कि सुंदरकांड का पाठ मनुष्य को हर तरह की बाधाओं से मुक्त करता है। रोग-दोष दूर होते हैं, घर में सुख-शांति बढ़ती है, ग्रहदोष शांत होते हैं और मन में ऐसा विश्वास जन्म लेता है, जिससे भय समाप्त होता है। यह केवल शास्त्रों में नहीं लिखा – हजारों-लाखों भक्तों ने इसे साक्षात अनुभव किया है।
कई लोग मुझसे पूछते हैं – “पंडित जी, इतना बड़ा संकल्प क्यों लिया? क्या एक पाठ पर्याप्त नहीं?” मैं सादर कहूंगा – अगर एक दीपक से किसी कमरे का कोना रोशन हो सकता है, तो हजार दीपक से पूरा घर प्रकाशमय हो जाता है। 1000 सुंदरकांड पाठ से जो दिव्य ऊर्जा उत्पन्न होगी, वह हमारे जीवन की हर दिशा में सुख, शांति और सुरक्षा का दीप जलाएगी। यही कारण है कि मैंने इस महायज्ञ का आयोजन करने का निश्चय किया। मैं चाहता हूं यह अलौकिक शक्ति हर परिवार में पहुंचे और सबकी मनोकामनाएं पूरी हों।
इस अनुष्ठान में प्रतिदिन शुद्ध वातावरण में सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा। दीपक, धूप, नैवेद्य, पुष्प और मंत्रोच्चार के साथ पवित्र अनुष्ठान होगा। प्रत्येक पाठ में हर सहयोगी का नाम संकल्प में लिया जाएगा और उनकी विशेष कामना के लिए प्रार्थना की जाएगी। हवन सामग्री, घी, भोग, वस्त्र और स्थान की व्यवस्था होगी। अनुष्ठान की पूर्णाहुति के पश्चात महाप्रसाद और आशीर्वाद वितरित किया जाएगा। यह कोई एक-दो दिन की पूजा नहीं – यह महीनों तक चलने वाला पावन महायज्ञ है, जिसे सफल बनाने के लिए हम सबका साझा प्रयास आवश्यक है।
कुछ लोग सोचते हैं – “पाठ तो आप कर ही लेंगे, फिर दान की आवश्यकता क्यों?” मैं पूरी ईमानदारी से बताना चाहता हूं कि इतना बड़ा आयोजन अकेले के बस का नहीं होता। इसमें घी, हवन सामग्री, दीपक, पुष्प, नैवेद्य, वस्त्र, पंडितों के मानधन, भंडारे की व्यवस्था और प्रसाद वितरण जैसी अनेक जिम्मेदारियां होती हैं। यह आयोजन तभी संभव होगा जब हम सब अपनी आस्था और सहयोग से इसे संपूर्ण करें। यह दान कोई शुल्क नहीं, बल्कि एक साझी श्रद्धा का प्रतीक है।
शास्त्रों में लिखा है – “दानं तपः साधनं च, पुण्यं वर्धयते सदा।” जब हम किसी पुण्य कार्य में हाथ बढ़ाते हैं, तो यह पुण्य लौटकर हमें ही शक्ति और आशीर्वाद देता है। दान करना धन की हानि नहीं, आत्मा की संपन्नता है। आपका दिया हुआ सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संकटों से रक्षा कवच बन सकता है।
दान की प्रक्रिया बहुत सरल है। आप वेबसाइट 👉 https://merikali.com/ पर जाइए। “Donation” सेक्शन में जाकर अपनी श्रद्धा अनुसार राशि और विवरण भरें। कोई राशि बाध्य नहीं है – चाहे ₹51 हो या ₹5100 – भावना ही सर्वोपरि है। दान करने के बाद हर पाठ में आपका नाम लिया जाएगा, आपकी कामना का संकल्प होगा, प्रमाणपत्र भेजा जाएगा और महाप्रसाद आपके घर आएगा।
यदि आपके जीवन में कोई विशेष कामना हो – संतान प्राप्ति, विवाह में बाधा, पुराने रोग, कर्ज मुक्ति या कारोबार में उन्नति – तो दान करते समय उसे जरूर बताइए। मैं विशेष संकल्प में उसका उच्चारण करूंगा।
एक सच्चा अनुभव मैं आपसे साझा करना चाहता हूं। बीते वर्ष एक श्रद्धालु भाई ने ₹201 का दान किया। उनकी बेटी का विवाह वर्षों से रुका था। अनुष्ठान में नाम लिया गया। कुछ ही सप्ताह में शुभ समाचार मिला। वे आज भी कहते हैं – “पंडित जी, यह संकटमोचन की असीम कृपा है।”
भक्तजनों, कई बार यह लेख पढ़ना भी कोई संयोग नहीं होता। हो सकता है यह स्वयं हनुमान जी की प्रेरणा हो कि आप इस पुण्य अवसर का हिस्सा बनें। कृपया इसे कल पर न टालें। आज ही सहयोग का हाथ बढ़ाइए। आपका दान किसी जरूरतमंद परिवार की तकलीफ का अंत कर सकता है और आपके जीवन में भी नए सवेरे का कारण बन सकता है।
👉 https://merikali.com/ पर जाकर आज ही सहभागी बनें। यह आयोजन हम सबका है। हर पाठ एक दीपक होगा। हर दान एक आशीर्वाद बनेगा। हर मनोकामना संकटमोचन के चरणों तक जाएगी।
🙏 जय श्रीराम | जय संकटमोचन | आपकी हर इच्छा पूरी हो।
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