आपकी आस्था का सजीव निमंत्रण

 र कोई अपने हिस्से के दुख, संघर्ष और आशाओं को साथ लेकर चलता है।

कोई बीमार है, कोई कर्ज से घिरा है, किसी के घर में कलह है, किसी के मन में भय।
इन सबके बीच हम ढूंढते हैं –
एक ऐसा सहारा, जो हमें टूटने न दे।

मेरे जीवन में भी ऐसे दौर आए जब चारों तरफ निराशा थी।
पर जैसे ही मैंने संकटमोचन हनुमान जी का स्मरण किया,
मन में अपार साहस और शक्ति का संचार हुआ।
वहीं से मेरे मन में यह संकल्प उपजा –
क्यों न मैं उनके चरणों में कुछ ऐसा अर्पण करूं, जो सबकी भलाई का माध्यम बन सके।

इसी विचार से मैं 1000 सुंदरकांड पाठ का अखंड अनुष्ठान करने जा रहा हूं।
यह आयोजन आपके और हम सबके कल्याण के लिए है।


🌿 सुंदरकांड – संकटमोचन का अमोघ उपाय

रामचरितमानस का सुंदरकांड वह अध्याय है,
जहां हनुमान जी ने असंभव को संभव कर दिखाया।
लंका की अग्नि में भी उनका साहस नहीं डिगा,
रावण के अहंकार को ललकारा,
माता सीता को आश्वासन दिया और रामकथा का दीप प्रज्वलित किया।

मान्यता है –
✅ सुंदरकांड का पाठ रोग-दोष निवारण में सहायक होता है।
✅ इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
✅ शत्रु भय, कोर्ट कचहरी के झंझट शांत होते हैं।
✅ मन में विश्वास और निडरता पैदा होती है।
✅ ग्रहदोष व वंश बाधाएं शांत होती हैं।

यह केवल शास्त्रीय मत नहीं –
लाखों भक्तों का अनुभव है।


🌸 1000 सुंदरकांड पाठ – इतना बड़ा संकल्प क्यों?

लोग अक्सर पूछते हैं –
“पंडित जी, एक पाठ से काम नहीं चलता?”

मैं सादर कहूंगा –
अगर एक दीपक अंधेरे में उजाला देता है,
तो हजार दीपक मिलकर रात को ही पराजित कर देते हैं।

इसी तरह 1000 पाठ से ऐसी दिव्य ऊर्जा उत्पन्न होती है,
जो हर घर को संकटों से मुक्त कर सकती है।
यह अनुष्ठान हम सभी के सुख-शांति और कल्याण के लिए समर्पित है।


🌿 अनुष्ठान की संक्षिप्त रूपरेखा

🌸 प्रतिदिन शुद्ध स्थान पर सुंदरकांड का पाठ होगा।
🌸 हर पाठ में दीपक, पुष्प, नैवेद्य और हवन सामग्री अर्पित की जाएगी।
🌸 हर सहयोगी का नाम संकल्प में उच्चारित किया जाएगा।
🌸 प्रत्येक पाठ के बाद विशेष प्रार्थना होगी।
🌸 पूर्णाहुति के समय महाप्रसाद और आशीर्वाद वितरित किया जाएगा।

यह साधारण आयोजन नहीं,
यह महीनों तक चलने वाला पुण्य महायज्ञ है।


🌼 सहयोग क्यों आवश्यक है?

कई लोग मन में सोचते हैं –
“पाठ तो आप कर सकते हैं, इसमें दान क्यों?”

मैं सच्चाई बताऊं –
इतने विशाल आयोजन के लिए अकेले मेरे संसाधन अपर्याप्त हैं।

🌿 शुद्ध घी, हवन सामग्री, दीपक, पुष्प, वस्त्र।
🌿 पंडितों के मानधन।
🌿 स्थान की व्यवस्था, सजावट, भंडारा।
🌿 प्रमाणपत्र और प्रसाद वितरण।

यह सब व्यवस्थाएं आपके सहयोग से ही संभव होंगी।
आपका दान कोई शुल्क नहीं –
एक साझी आस्था का प्रतीक है।


🌿 दान का महत्व – पुण्य की अमिट संचित संपदा

शास्त्रों में लिखा है –
“दानं तपः साधनं च, पुण्यं वर्धयते सदा।”
दान और तप, यही सच्चा साधन है।

जब आप किसी पुण्य कार्य में हाथ बढ़ाते हैं,
तो यह पुण्य आपकी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी
संकटों से रक्षा कवच बन जाता है।


🌸 दान कैसे करें?

🌿 वेबसाइट पर जाएं –
👉 https://merikali.com/

🌿 “Donation” सेक्शन खोलें।
🌿 अपनी श्रद्धा अनुसार राशि और विवरण भरें।
🌿 भुगतान करें।

राशि कोई बाध्यता नहीं –
चाहे ₹51 हो या ₹5100 –
भावना ही सर्वोपरि है।


🌼 दान करने पर क्या मिलेगा?

✅ हर पाठ में आपका नाम संकल्प में बोला जाएगा।
✅ आपकी विशेष मनोकामना के लिए प्रार्थना होगी।
✅ पूर्णाहुति के बाद प्रमाणपत्र भेजा जाएगा।
✅ महाप्रसाद और आशीर्वाद संदेश आपके घर आएगा।

आप यह दान अपने माता-पिता, पूर्वजों, परिवार या संतान के नाम से भी कर सकते हैं।


🌿 यदि कोई विशेष कामना हो…

🔹 संतान प्राप्ति की इच्छा।
🔹 विवाह में आ रही रुकावट।
🔹 लंबे रोग से मुक्ति।
🔹 कर्ज निवारण।
🔹 व्यवसाय में तरक्की।
तो दान करते समय उल्लेख अवश्य करें।
मैं संकल्प में उसका विशेष उच्चारण करूंगा।


🌸 एक सच्चा अनुभव

बीते वर्ष एक भाई ने ₹201 का सहयोग किया था।
उनकी बेटी का विवाह लंबे समय से अटका था।
अनुष्ठान में नाम लिया गया।
कुछ ही सप्ताह में विवाह की बात तय हो गई।

वे आज भी कहते हैं –
“पंडित जी, यह केवल आपकी मेहनत नहीं –
हनुमान जी की कृपा थी।”


🌼 अंतिम निवेदन – इसे कल पर न टालें

भक्तजन,
कभी-कभी यह लेख पढ़ना भी
कोई संयोग नहीं होता।

हो सकता है यह संकटमोचन की प्रेरणा हो
कि आप इस पुण्य अवसर का हिस्सा बनें।
कृपया आज ही हाथ बढ़ाइए।


🌿 दान का लिंक – अभी क्लिक करें

👉 https://merikali.com/


🌸 आपका सहयोग – पुण्य का दीप

यह आयोजन हम सबका है।
हर पाठ एक दीपक बनेगा।
हर दान एक आशीर्वाद बनेगा।

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